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छः घंटे, 3 KM और महादेव भक्ती की अटूट आस्था

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रात्रि 12 बजे शुरू हुई दंडवत यात्रा, सुबह 6 बजे  पहुंची पचदेवरी के सैकड़ों युवा शिव भक्तों की टोली

सावन के अंतिम सोमवार पर बाबा निंबेश्वर नाथ के दरबार पहुंचे युवा, चार साल से लगातार निभा रहे परंपरा

गोरखपुर। सावन के चौथे और अंतिम सोमवार पर जिले के ब्रह्मपुर ब्लॉक अंतर्गत पचदेवरी गांव में शिव भक्ति की अनोखी तस्वीर देखने को मिली। गांव के सैकड़ों युवाओं ने बाबा निंबेश्वर नाथ के प्रति अपनी आस्था प्रकट करने के लिए करीब तीन किलोमीटर की दूरी दंडवत करते हुए तय की। जमीन पर लेटकर दंडवत करने के बाद कुछ कदम आगे बढ़ना और फिर दोबारा उसी तरह यात्रा जारी रखना युवाओं के संकल्प और समर्पण को दर्शाता रहा। रास्ते भर हर-हर महादेव और भोलेनाथ के जयकारों से माहौल शिवमय बना रहा।

चार साल से श्रावण मास में जारी है दंडवत यात्रा का सिलसिला

युवाओं का यह दंडवत यात्रा का सिलसिला पिछले चार वर्षों से लगातार जारी है। सावन के अंतिम सोमवार को गांव से सैकड़ों युवा एक साथ बाबा निंबेश्वर नाथ मंदिर के लिए रवाना होते हैं। करीब तीन किलोमीटर की दूरी सामान्य तरीके से तय करने के बजाय युवा दंडवत करते हुए मंदिर तक पहुंचते हैं। कठिन यात्रा के बावजूद युवाओं में उत्साह और आस्था दिखाई दी।


पहले मंदिर की परिक्रमा, फिर कुंड में स्नान

करीब तीन किलोमीटर की दंडवत यात्रा पूरी करने के बाद युवा बाबा निंबेश्वर नाथ मंदिर पहुंचे। मंदिर पहुंचने के बाद सबसे पहले बाबा की परिक्रमा की गई। इसके बाद मंदिर परिसर के पास स्थित कुंड में युवाओं ने स्नान किया। स्नान के बाद सभी दोबारा मंदिर पहुंचे और भगवान शिव की पूजा-अर्चना करते हुए शिवलिंग पर जलाभिषेक किया।

पूजा के दौरान युवाओं ने भगवान शिव का स्मरण करते हुए अपनी मनोकामनाओं के लिए प्रार्थना की। मंदिर परिसर में मौजूद श्रद्धालुओं और ग्रामीणों ने भी युवाओं की इस अनोखी भक्ति को देखा और उनके संकल्प की सराहना की।


स्वयंभू शिवलिंग की मान्यता

ब्रह्मपुर क्षेत्र स्थित बाबा निंबेश्वर नाथ मंदिर को लेकर स्थानीय लोगों में गहरी धार्मिक आस्था है। मान्यता है कि मंदिर में स्थापित शिवलिंग स्वयंभू है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि बाबा निंबेश्वर नाथ के दरबार में सच्चे मन से पूजा-अर्चना करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं। इसी आस्था के चलते सावन के महीने में मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं और भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं।मंदिर परिसर में स्थित कुंड को लेकर भी स्थानीय स्तर पर धार्मिक मान्यता है। श्रद्धालुओं का मानना है कि कुंड में स्नान करने से त्वचा संबंधी रोगों से राहत मिलती है। हालांकि यह धार्मिक मान्यता है, जिसका स्थानीय श्रद्धालु लंबे समय से पालन करते आ रहे हैं।

श्रावण मास में लगता है वृहद मेला

सावन के महीने में बाबा निंबेश्वर नाथ मंदिर पर श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ जाती है। दूर-दराज के क्षेत्रों से लोग यहां भगवान शिव का जलाभिषेक करने पहुंचते हैं। सावन और अन्य प्रमुख अवसरों पर मंदिर परिसर में भंडारे और प्रसाद वितरण जैसे कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं।

आधुनिक दौर में युवाओं की इस दंडवत यात्रा परंपरा की चहुंओर चर्चा

पचदेवरी के युवाओं की दंडवत यात्रा इस आयोजन की सबसे खास तस्वीर रही। पिछले चार वर्षों से लगातार युवा इस कठिन यात्रा को पूरा कर बाबा निंबेश्वर नाथ के दरबार में पहुंच रहे हैं। आधुनिक दौर में युवाओं का इस तरह धार्मिक परंपरा और आस्था से जुड़ना स्थानीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बना हुआ है।सैकड़ों युवाओं का एक साथ दंडवत करते हुए तीन किलोमीटर की दूरी तय करना केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि उनके लिए आस्था और संकल्प का प्रतीक है। रास्ते की कठिनाई और शारीरिक थकान के बावजूद युवाओं ने यात्रा पूरी की और मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना तथा जलाभिषेक किया।

युवाओं की दंडवत यात्रा आस्था और समर्पण की अनौखी मिसाल

पचदेवरी में सावन के अंतिम सोमवार पर दिखाई दिया यह दृश्य आस्था, परंपरा और युवाओं के समर्पण की अनोखी तस्वीर पेश करता रहा। तीन किलोमीटर की दंडवत यात्रा के बाद बाबा निंबेश्वर नाथ के दरबार में पहुंचकर युवाओं ने भगवान शिव की आराधना की और अपनी परंपरा को लगातार चौथे वर्ष भी आगे बढ़ाया।

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